शेर-ओ-ग़ज़ल
Sunday, 3 April 2016
हवा
"मै जहाँ तुम को बुलाऊँ वहाँ तक आओ
मेरी नज़रों से गुज़र कर दिलोजान तक आओ "
"फिर ये देखो कि ज़माने की हवा है कैसी
साथ मेरे ,मेरे फिरदौस ए जवां तक आओ"
"फूल के गिर्द फिरो बाग़ में मानिंद- ए- नसीम
मिस्ले परवाना किसे शामे तपन तक आओ"
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