शेर-ओ-ग़ज़ल
Monday, 4 April 2016
एहसान
"मै न हिन्दू न मुसलमान मुझे जीने दो
दोस्ती है मेरा ईमान मुझे जीने दो "
"कोई एहसान न करो मुझ पे तो एहसान होगा
सिर्फ इतना करो एहसान मुझे जीने दो "
"सब के दुःख दर्द को अपना समझ कर जीना
बस यही है मेरा अरमान मुझे जीने दो "
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