"अम्न का जो पैग़ाम सुनाने वाले हैं
वो गलियों में आग लगाने वाले हैँ "
"तुम ले जाओ अपनी नेज़ा ,खंजर और तलवार,
हम तो सिर्फ प्यार मोहब्बत बाटने वाले हैं"
"ज़ुल्म के काले बादल से डरना कैसा ,
ये मौसम तो आने जाने वाले हैं "
"आम आदमी का अब तो ख़ुदा ही है हाफ़िज़
सारे मसीहा नफरत का ज़हर पिलाने वाले हैं"
"माल बनाने वाले तो सब है लेकिन
सोचो अब कितने ईमान बचाने वाले है"

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