बताओ तो सही तुमने पढ़ा कुछ भी नहीं है क्या,
ज़मी के खुश्क होठों पर लिखा कुछ भी नहीं है क्या.
दरख्तों के छिले जख्मों को तुम छू कर बताओ तो,
बदन सूखा हुआ है गर ,हरा कुछ भी नहीं है क्या.
नदी ने डूब कर मिटटी में कर ली खुदकशी लेकिन,
किनारों ने जुदा होकर सहा कुछ भी नहीं है क्या.
कहीं तन्हाईयों में बैठ कर रोते हुए अक्सर,
मेरी तस्वीर से तुमने कहा कुछ भी नहीं है क्या.
मुझे मालूम है होकर जुदा टूटे नहीं हो तुम,
सुनो आवाज़ अंदर की गिरा कुछ भी नहीं है क्या.
बहुत जिद्दी है सहरा ये नदी पी जाएगा सारी ,
मगर फिर भी ये सोचेगा,बचा कुछ भी नहीं है क्या.
कभी दिल से लगा कर कान सुनना धडकनें मेरी,
बताना फिर मुझे तुमने सुना कुछ भी नहीं है क्या.
मुझे तूफ़ान कहता है की वो कश्ती डुबो देगा,
अगर सब -कुछ वही है तो खुदा कुछ भी नहीं है क्या.
ज़मी के खुश्क होठों पर लिखा कुछ भी नहीं है क्या.
दरख्तों के छिले जख्मों को तुम छू कर बताओ तो,
बदन सूखा हुआ है गर ,हरा कुछ भी नहीं है क्या.
नदी ने डूब कर मिटटी में कर ली खुदकशी लेकिन,
किनारों ने जुदा होकर सहा कुछ भी नहीं है क्या.
कहीं तन्हाईयों में बैठ कर रोते हुए अक्सर,
मेरी तस्वीर से तुमने कहा कुछ भी नहीं है क्या.
मुझे मालूम है होकर जुदा टूटे नहीं हो तुम,
सुनो आवाज़ अंदर की गिरा कुछ भी नहीं है क्या.
बहुत जिद्दी है सहरा ये नदी पी जाएगा सारी ,
मगर फिर भी ये सोचेगा,बचा कुछ भी नहीं है क्या.
कभी दिल से लगा कर कान सुनना धडकनें मेरी,
बताना फिर मुझे तुमने सुना कुछ भी नहीं है क्या.
मुझे तूफ़ान कहता है की वो कश्ती डुबो देगा,
अगर सब -कुछ वही है तो खुदा कुछ भी नहीं है क्या.

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