ज़ुबाँ ख़ामोश रह जाए,
जो ग़म आँखों से ढल जाए
ये दिल क़ाबू में आ जाए,
जो पल-दो पल बहल जाए
जो ग़म आँखों से ढल जाए
ये दिल क़ाबू में आ जाए,
जो पल-दो पल बहल जाए
चरागों को जलाते थे,
उजालों को मनाते थे
बड़ी मुश्क़िल से हम,
अपने अँधेरों को सजाते थे
समां रौशन नज़र आए,
जो ग़म आँखों से ढल जाए
ये दिल क़ाबू में आ जाए,
जो पल-दो पल बहल जाए
कहाँ तक रास्ते हमको,
भला ले कर के जाएंगें
कहाँ तक ज़िन्दगी से हम,
भला मोहलत भी पाएंगे
ख़ुशी कुछ पल ठहर जाए,
जो ग़म आँखों से ढल जाए
ये दिल क़ाबू में आ जाए,
जो पल-दो पल बहल जाए
वो पल आए, या ना आए,
वो कल आए, या न आए
तमन्नाओं की वादी में,
बहार आए या, ना आए
बुझा मौसम ये खिल जाए
जो ग़म आँखों से ढल जाए
ये दिल क़ाबू में आ जाए
जो पल-दो पल बहल जाए
ज़ुबाँ ख़ामोश रह जाए,
जो ग़म आँखों से ढल जाए
ये दिल क़ाबू में आ जाए
जो पल-दो पल बहल जाए ,!"
उजालों को मनाते थे
बड़ी मुश्क़िल से हम,
अपने अँधेरों को सजाते थे
समां रौशन नज़र आए,
जो ग़म आँखों से ढल जाए
ये दिल क़ाबू में आ जाए,
जो पल-दो पल बहल जाए
कहाँ तक रास्ते हमको,
भला ले कर के जाएंगें
कहाँ तक ज़िन्दगी से हम,
भला मोहलत भी पाएंगे
ख़ुशी कुछ पल ठहर जाए,
जो ग़म आँखों से ढल जाए
ये दिल क़ाबू में आ जाए,
जो पल-दो पल बहल जाए
वो पल आए, या ना आए,
वो कल आए, या न आए
तमन्नाओं की वादी में,
बहार आए या, ना आए
बुझा मौसम ये खिल जाए
जो ग़म आँखों से ढल जाए
ये दिल क़ाबू में आ जाए
जो पल-दो पल बहल जाए
ज़ुबाँ ख़ामोश रह जाए,
जो ग़म आँखों से ढल जाए
ये दिल क़ाबू में आ जाए
जो पल-दो पल बहल जाए ,!"
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