ऐसा भी रूहानी मंज़र मिला मुझे ,
उसने अपनी खुशबू से भर दिया मुझे.
दर पे उसके बेघर होकर क्या पहुंचा ,
उसने रहने को अपना घर दिया मुझे.
अपनी दुआ में मुझको शामिल करते हुए,
क़तरे ने इस बार समंदर दिया मुझे.
घर का आईना सोच के अब तक हैराँ है,
आख़िर किसने हाथ में पत्थर दिया मुझे.
मेरे अँधेरे सारे छीन लिए मुझसे,
अपने नूर से नूरानी कर दिया मुझे.
चलने को काँटों के रस्ते दिए मगर,
सोने को फूलों का बिस्तर दिया मुझे.
मीर का वारिस होकर अब मैं सोचता हूँ,
बुरे वक़्त ने कैसा मुक़द्दर दिया मुझे.
उसने अपनी खुशबू से भर दिया मुझे.
दर पे उसके बेघर होकर क्या पहुंचा ,
उसने रहने को अपना घर दिया मुझे.
अपनी दुआ में मुझको शामिल करते हुए,
क़तरे ने इस बार समंदर दिया मुझे.
घर का आईना सोच के अब तक हैराँ है,
आख़िर किसने हाथ में पत्थर दिया मुझे.
मेरे अँधेरे सारे छीन लिए मुझसे,
अपने नूर से नूरानी कर दिया मुझे.
चलने को काँटों के रस्ते दिए मगर,
सोने को फूलों का बिस्तर दिया मुझे.
मीर का वारिस होकर अब मैं सोचता हूँ,
बुरे वक़्त ने कैसा मुक़द्दर दिया मुझे.

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