भले ही प्यार तू मंज़ूर मत कर,
मुझे नज़रों से लेकिन दूर मत कर.
बहुत मजबूर पहले से ही हूँ मैं,
मुझे अब और तू मजबूर मत कर.
मैं सूरज हो के तरसूं रोशनी को,
मुझे इतना भी तू बेनूर मत कर.
यही किस्से हमें रुसवा करेंगे ,
इन्हें बाज़ार में मशहूर मत कर.
मैं शीशा हूँ कोई हीरा नहीं हूँ,
मगर मुझको गिरा कर चूर मत कर.
न कर महसूस मेरा दर्द चाहे,
मगर ज़ख्मों को तू नासूर मत कर.
भुलाने को जो रिश्ता रह गया है,
निभाने का उसे दस्तूर मत कर.
मुझे नज़रों से लेकिन दूर मत कर.
बहुत मजबूर पहले से ही हूँ मैं,
मुझे अब और तू मजबूर मत कर.
मैं सूरज हो के तरसूं रोशनी को,
मुझे इतना भी तू बेनूर मत कर.
यही किस्से हमें रुसवा करेंगे ,
इन्हें बाज़ार में मशहूर मत कर.
मैं शीशा हूँ कोई हीरा नहीं हूँ,
मगर मुझको गिरा कर चूर मत कर.
न कर महसूस मेरा दर्द चाहे,
मगर ज़ख्मों को तू नासूर मत कर.
भुलाने को जो रिश्ता रह गया है,
निभाने का उसे दस्तूर मत कर.

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