दूर होकर भी तुझे मैं दूर कर पाया नहीं।
ग़ैर की तू है कभी ये ख्याल आया नहीं।
बेवफा कहता तुझे जो बेवफा होती अगर ,
सोचता हूँ क्या कहूँ ये सोच भी पाया नहीं।
ग़ैर की तू है कभी ये ख्याल आया नहीं।
बेवफा कहता तुझे जो बेवफा होती अगर ,
सोचता हूँ क्या कहूँ ये सोच भी पाया नहीं।
खूबसूरत और भी चेहरे कई देखे मगर ,
एक भी तुझ सा कहीं भी दूसरा पाया नहीं।
याद है हर एक पल जो साथ में गुजरा कभी ,
आइना जज्बात का इक बार धुंधलाया नहीं।
जबतलक तू साथ थी मौसम सभी थे खुशनुमा ,
बाद तेरे आजतक मौसम वही आया नहीं।
खाब में आना नहीं तू छोड़ता है इसलिए ,
चाहकर भी मैं तुझे दिल से भुला पाया।
एक भी तुझ सा कहीं भी दूसरा पाया नहीं।
याद है हर एक पल जो साथ में गुजरा कभी ,
आइना जज्बात का इक बार धुंधलाया नहीं।
जबतलक तू साथ थी मौसम सभी थे खुशनुमा ,
बाद तेरे आजतक मौसम वही आया नहीं।
खाब में आना नहीं तू छोड़ता है इसलिए ,
चाहकर भी मैं तुझे दिल से भुला पाया।
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