क्या मिलेगा यूं मुहब्बत पर उठाकर उंगलियां अब।
बेबजह बेकार की करते हुए बस चुगलियाँ अब।
प्यार का जो आशियाना गर बनाता है कोई तो ,
है तुम्हें क्या हक़ गिराओ एकदम से बिजलियाँ अब।
बेबजह बेकार की करते हुए बस चुगलियाँ अब।
प्यार का जो आशियाना गर बनाता है कोई तो ,
है तुम्हें क्या हक़ गिराओ एकदम से बिजलियाँ अब।
फड़फड़ाती पंख अपने फिर रही हैं फूल पर वो ,
और तुम बर्बाद करने पर तुले हो तितलियाँ अब।
पास आते हैं अगर दो दिल तड़पकर प्यार में तो ,
मत बढ़ाओ दरम्यां उनके यकायक दूरियां अब।
काश कुछ महसूस करते दर्दे दिल इक बार भी जो ,
कुछ पता चलती मुहब्बत की तुम्हें दुश्वारियां अब।
रात दिन जलते शम्मा की तरह खामोश रहके ,
खुद धुंआ होकर उजाले की किये हैं रश्मियाँ अब।
और तुम बर्बाद करने पर तुले हो तितलियाँ अब।
पास आते हैं अगर दो दिल तड़पकर प्यार में तो ,
मत बढ़ाओ दरम्यां उनके यकायक दूरियां अब।
काश कुछ महसूस करते दर्दे दिल इक बार भी जो ,
कुछ पता चलती मुहब्बत की तुम्हें दुश्वारियां अब।
रात दिन जलते शम्मा की तरह खामोश रहके ,
खुद धुंआ होकर उजाले की किये हैं रश्मियाँ अब।
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