"दिल जो मिलाने आये
शत्रु भी हमसे तब
सब कलह द्वेष को
पाट देना चाहिए
आँखें दिखाए अगर
आँखे निकालो तुम
शरीर और साँस को
बाँट देना चाहिये
छीन लो सुविधा सारी,
कर दो सम्मन जारी
ऐसे लोगों से छीन
ठाठ लेने चाहिये
जो आतंकवादियों को
खुले में शहीद कहे
ऐसे देशद्रोहियों को
काट देना चाहिये"
शत्रु भी हमसे तब
सब कलह द्वेष को
पाट देना चाहिए
आँखें दिखाए अगर
आँखे निकालो तुम
शरीर और साँस को
बाँट देना चाहिये
छीन लो सुविधा सारी,
कर दो सम्मन जारी
ऐसे लोगों से छीन
ठाठ लेने चाहिये
जो आतंकवादियों को
खुले में शहीद कहे
ऐसे देशद्रोहियों को
काट देना चाहिये"
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