(अर्थशास्त्र का नियम है बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को
चलन से बाहर कर देती है )
हर कोई सच बोल रहा है झूठी किसकी बात कहें।
किसे दिमागी खुराफात इक किसे दिली जज्बात कहें।
चलन से बाहर कर देती है )
हर कोई सच बोल रहा है झूठी किसकी बात कहें।
किसे दिमागी खुराफात इक किसे दिली जज्बात कहें।
सबने कुछ ना कुछ भोगा है सबका निजी तजुर्बा है ,
किसकी नीची जात कहें या किसकी ऊंची जात कहें।
इक ने सब कुछ पाकर खोया इक ने खोकर पाया है ,
किसकी सचमुच जीत हुई है किसे हुई है मात कहें।
एक शख्स को मिले अँधेरे चाँद सितारे दूजे को ,
किसे कहें है दिन नसीब में कौन मुकद्दर रात कहें।
अपनी अपनी बातें कहने का सबका हक़ बनता है ,
किसे मिली अपनी मंजिल है किसे हुई शुरुआत कहें।
कोई मुद्दत बात हंसा है कोई रोया हंस हंस कर ,
किस पर टूटा कहर वक्त का किसे मिली सौगात कहें।
रह रहकर इक बात जेहन में उमड़ घुमड़ बस होती है ,
किसे वक्त की साजिश या फिर किसको हम हालात कहें।
किसकी नीची जात कहें या किसकी ऊंची जात कहें।
इक ने सब कुछ पाकर खोया इक ने खोकर पाया है ,
किसकी सचमुच जीत हुई है किसे हुई है मात कहें।
एक शख्स को मिले अँधेरे चाँद सितारे दूजे को ,
किसे कहें है दिन नसीब में कौन मुकद्दर रात कहें।
अपनी अपनी बातें कहने का सबका हक़ बनता है ,
किसे मिली अपनी मंजिल है किसे हुई शुरुआत कहें।
कोई मुद्दत बात हंसा है कोई रोया हंस हंस कर ,
किस पर टूटा कहर वक्त का किसे मिली सौगात कहें।
रह रहकर इक बात जेहन में उमड़ घुमड़ बस होती है ,
किसे वक्त की साजिश या फिर किसको हम हालात कहें।
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