Thursday, 17 March 2016

मै सोचता था मगर........

मै सोचता था मग़र ...इतना नहीं था
प्यार का असर कभी दिखता नहीं था****
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खुदको खुदी मे समेटा था इतना हमने
अफ़सोस-ए-गम हमने सिखा नहीं था****
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तुमको जीताकर हम,हारते रहे हरदम
तेरी बेवफाई का जहरअभी उतरा नहीं था*
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मै सोचता था मगर...........
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