मिले जो ग़मो से फुर्सत तो...
सुनाये फिर फ़साना।
के टपक पड़े नज़र से.....
मय-ए-इश्रत-शबाना।
यही जिंदगी मुसीबत...
यही मुकद्दर का फ़साना।
इन टेढ़े-मेढ़े रास्तो से....
तु हँस-रोकर गुजर जाना।
कुछ रंज नही है....
न शिकवा-ए-मदावा।
तेरी नादानियों ने ही...
उजाड़ा तेरा आशियाना।
महफ़िल के कह-कहो मे..
फिर यादों मे डुबकी लगाना।
तेरे संग चलते-चलते...
गुजर गया इक जमाना।
तकदीर बदलते-बदलते...
तसवीरों मे कैद न हो जाना।
कही आँशुओ की रो मे....
तु भूल न जाना मुसकुराना।
बड़ा संभाल रक्खा था हमने..
तेरे दिए गमो का पिटारा।
दिलो की तफ्तीशो से बिखरकर..
लौटा रहा हूँ ...तेरा नज़राना।
सुनाये फिर फ़साना।
के टपक पड़े नज़र से.....
मय-ए-इश्रत-शबाना।
यही जिंदगी मुसीबत...
यही मुकद्दर का फ़साना।
इन टेढ़े-मेढ़े रास्तो से....
तु हँस-रोकर गुजर जाना।
कुछ रंज नही है....
न शिकवा-ए-मदावा।
तेरी नादानियों ने ही...
उजाड़ा तेरा आशियाना।
महफ़िल के कह-कहो मे..
फिर यादों मे डुबकी लगाना।
तेरे संग चलते-चलते...
गुजर गया इक जमाना।
तकदीर बदलते-बदलते...
तसवीरों मे कैद न हो जाना।
कही आँशुओ की रो मे....
तु भूल न जाना मुसकुराना।
बड़ा संभाल रक्खा था हमने..
तेरे दिए गमो का पिटारा।
दिलो की तफ्तीशो से बिखरकर..
लौटा रहा हूँ ...तेरा नज़राना।
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