मुद्दतों से शख्श जो रहता है मुझमें कौन है,
अनकहा जो सुन लिया करता है मुझमें कौन है.
सब मुझे मजबूत देखें ये जताने के लिए,
जो किसी दीवार से ढहता है मुझ में कौन है.
सो मैं जाता हूँ किसी की याद में जगते हुए,
बाद सोने के भी जो जगता है मुझमे कौन है.
रेत पर जब धूप में चलता हूँ नंगे पाँव तब,
जो कि दरिया की तरह बहता है मुझमें कौन है.
रात में जो चांदनी के बीज बो दे हाँ वही,
हर सुबह जो धूप सा खिलता है मुझमें कौन है.
.
जब अकेले में कभी करता हूँ उसका सामना,
वो भी मुझ से बस यही कहता है मुझमें कौन है.
अनकहा जो सुन लिया करता है मुझमें कौन है.
सब मुझे मजबूत देखें ये जताने के लिए,
जो किसी दीवार से ढहता है मुझ में कौन है.
सो मैं जाता हूँ किसी की याद में जगते हुए,
बाद सोने के भी जो जगता है मुझमे कौन है.
रेत पर जब धूप में चलता हूँ नंगे पाँव तब,
जो कि दरिया की तरह बहता है मुझमें कौन है.
रात में जो चांदनी के बीज बो दे हाँ वही,
हर सुबह जो धूप सा खिलता है मुझमें कौन है.
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जब अकेले में कभी करता हूँ उसका सामना,
वो भी मुझ से बस यही कहता है मुझमें कौन है.
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