पलकों पे उसने इस तरह सपना छिपा लिया,
जैसे किसी गरीब ने दुखड़ा छिपा लिया.
मुर्दे के साथ ख़्वाहिशें भी दफ्न हो गयीं,
मिटटी के इक मकान ने क्या-क्या छिपा लिया.
कैसे कहूँ की उसने मेरे साथ क्या किया,
सागर दिया निज़ाम में क़तरा छिपा लिया. निज़ाम=राज्य
ज्यादा दिनों न चल सका ख़्वाबों का सिलसिला,
लोगों ने मेरी नींद का जरिया छिपा लिया.
थी कर्बला में प्यास की दहशत भी किस तरह,
सहरा ने दर के कोख़ में दरिया छिपा लिया.
अब तक मेरी निग़ाह से रगबत तो है उसे, रगबत=लगाव
कैसे हुआ मैं प्यार में रुसवा छिपा लिया.
उस से बिछड़ के जिस घड़ी तनहा हुआ था मैं,
नज़रों ने वही दर्द का लम्हा छिपा लिया.
आने पे उसने ज़िक्र मेरा बात फेर कर,
बरसों रहा जो प्यार का रिश्ता छिपा लिया.
जैसे किसी गरीब ने दुखड़ा छिपा लिया.
मुर्दे के साथ ख़्वाहिशें भी दफ्न हो गयीं,
मिटटी के इक मकान ने क्या-क्या छिपा लिया.
कैसे कहूँ की उसने मेरे साथ क्या किया,
सागर दिया निज़ाम में क़तरा छिपा लिया. निज़ाम=राज्य
ज्यादा दिनों न चल सका ख़्वाबों का सिलसिला,
लोगों ने मेरी नींद का जरिया छिपा लिया.
थी कर्बला में प्यास की दहशत भी किस तरह,
सहरा ने दर के कोख़ में दरिया छिपा लिया.
अब तक मेरी निग़ाह से रगबत तो है उसे, रगबत=लगाव
कैसे हुआ मैं प्यार में रुसवा छिपा लिया.
उस से बिछड़ के जिस घड़ी तनहा हुआ था मैं,
नज़रों ने वही दर्द का लम्हा छिपा लिया.
आने पे उसने ज़िक्र मेरा बात फेर कर,
बरसों रहा जो प्यार का रिश्ता छिपा लिया.
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