याद के वीरान जंगल में बस्तियाँ मुश्किल से आती हैं,
घाट वो हैं लौटकर जिनपे कश्तियाँ मुश्किल से आती हैं.
रंग और ख़ुशबू चुराकर तुम महकने तो लग गए लेकिन,
काग़ज़ी हो फूल तो उनपे तितलियाँ मुश्किल से आती हैं.
शहर के वे माईबापों में इस क़दर मशरूफ़ हैं कि अब,
गाँव के माँ-बाप तक उनकी चिट्ठियाँ मुश्किल से आती हैं.
अब तो अपने घर पे ख़ुशियाँ भी इस तरह आने लगीं जैसे,
बाप के घर बाद शादी के बेटियाँ मुश्किल से आती हैं.
नींद में भी झोलियाँ लेकर मुफलिसों के फिर रहे बच्चे,
सोचते हैं ख़्वाब में भी क्यों रोटियाँ मुश्किल से आती हैं.
तुम जो वादे कर रहे हो वे ख़ूबसूरत हैं यक़ीनन ही,
जाल में लेकिन मछेरों के मछलियाँ मुश्किल से आती हैं.
इस नई तहज़ीब के युग में खिदमतें करना बुजुर्गों की,
आदतें ये इस तरह की हैं जो मियाँ मुश्किल से आती हैं.
घाट वो हैं लौटकर जिनपे कश्तियाँ मुश्किल से आती हैं.
रंग और ख़ुशबू चुराकर तुम महकने तो लग गए लेकिन,
काग़ज़ी हो फूल तो उनपे तितलियाँ मुश्किल से आती हैं.
शहर के वे माईबापों में इस क़दर मशरूफ़ हैं कि अब,
गाँव के माँ-बाप तक उनकी चिट्ठियाँ मुश्किल से आती हैं.
अब तो अपने घर पे ख़ुशियाँ भी इस तरह आने लगीं जैसे,
बाप के घर बाद शादी के बेटियाँ मुश्किल से आती हैं.
नींद में भी झोलियाँ लेकर मुफलिसों के फिर रहे बच्चे,
सोचते हैं ख़्वाब में भी क्यों रोटियाँ मुश्किल से आती हैं.
तुम जो वादे कर रहे हो वे ख़ूबसूरत हैं यक़ीनन ही,
जाल में लेकिन मछेरों के मछलियाँ मुश्किल से आती हैं.
इस नई तहज़ीब के युग में खिदमतें करना बुजुर्गों की,
आदतें ये इस तरह की हैं जो मियाँ मुश्किल से आती हैं.
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