खोल खिड़की हवा घर में आने भी दे,
पंछियों को ग़ज़ल गुनगुनाने भी दे.
फूल दरगाहों में कुछ चढ़ाने भी दे,
खुश्बूओं को दुआएं कमाने भी दे.
छोड़ दे कश्तियाँ अपनी तूफ़ान में,
अपनी ताक़त उन्हें आजमाने भी दे.
शानो-शौक़त से एहसास मत पाल तू,
उनको ठोकर ज़माने की खाने भी दे.
किस तरह दर्द को पालते हम रहे,
क्या बताऊँ तुझे बात जाने भी दे.
उसका अंदाज़ बदला है कुछ देर को,
गुस्सा झूंठा उसे कुछ दिखाने भी दे.
इस तरह साथ रख सबके नजदीकियां,
पास आने भी दे दूर जाने भी दे.
पंछियों को ग़ज़ल गुनगुनाने भी दे.
फूल दरगाहों में कुछ चढ़ाने भी दे,
खुश्बूओं को दुआएं कमाने भी दे.
छोड़ दे कश्तियाँ अपनी तूफ़ान में,
अपनी ताक़त उन्हें आजमाने भी दे.
शानो-शौक़त से एहसास मत पाल तू,
उनको ठोकर ज़माने की खाने भी दे.
किस तरह दर्द को पालते हम रहे,
क्या बताऊँ तुझे बात जाने भी दे.
उसका अंदाज़ बदला है कुछ देर को,
गुस्सा झूंठा उसे कुछ दिखाने भी दे.
इस तरह साथ रख सबके नजदीकियां,
पास आने भी दे दूर जाने भी दे.
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