वक़्त ने भी नहीं सुनी मेरी,
बात निकली मगर सही मेरी.
मिलके सूरज ने चाँद तारों से,
छीन ली मुझसे रोशनी मेरी.
जब भी होंठों तलक़ हंसी आयी,
हादसे ले गये हंसी मेरी.
दुश्मनों की तरह नहीं मिलते,
देख लेते जो दोस्ती मेरी.
मेरी पलकें तुम्हें बता देंगी,
आंसूओं में रही ख़ुशी मेरी.
मुझ से काटा गया न इक लम्हा,
कट गयी फिर भी ज़िन्दगी मेरी.
अपने ईमान को बचाने में ,
काम आई है शायरी मेरी.
बात निकली मगर सही मेरी.
मिलके सूरज ने चाँद तारों से,
छीन ली मुझसे रोशनी मेरी.
जब भी होंठों तलक़ हंसी आयी,
हादसे ले गये हंसी मेरी.
दुश्मनों की तरह नहीं मिलते,
देख लेते जो दोस्ती मेरी.
मेरी पलकें तुम्हें बता देंगी,
आंसूओं में रही ख़ुशी मेरी.
मुझ से काटा गया न इक लम्हा,
कट गयी फिर भी ज़िन्दगी मेरी.
अपने ईमान को बचाने में ,
काम आई है शायरी मेरी.
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