ना जाने क्यों मुझसे अब वो बात नहीं करता है।
इन्तजार में जाया भी लम्हात नहीं करता है।
उसके दिल में क्या चलता है नहीं जानता कोई ,
भूले से भी जाहिर कुछ जज्बात नहीं करता है।
इन्तजार में जाया भी लम्हात नहीं करता है।
उसके दिल में क्या चलता है नहीं जानता कोई ,
भूले से भी जाहिर कुछ जज्बात नहीं करता है।
अक्सर चेहरे पर खामोशी सी पसरी रहती है ,
लेकिन कभी उजागर भी हालात नहीं करता है।
चुपके चुपके दिल में हर गम सहता रहता है ,
अश्कों की मगर ज़रा सी भी बरसात नहीं करता है।
वो पत्थर दिल है ऐसा भी कहना है बेमानी ,
सहकर भी जो दर्द बयां जुल्मात नहीं करता है।
तारे तोड़ भले ले कोई उसे मनाना मुश्किल ,
कुछ भी हो मुस्काने की शुरुआत नहीं करता है।
लेकिन कभी उजागर भी हालात नहीं करता है।
चुपके चुपके दिल में हर गम सहता रहता है ,
अश्कों की मगर ज़रा सी भी बरसात नहीं करता है।
वो पत्थर दिल है ऐसा भी कहना है बेमानी ,
सहकर भी जो दर्द बयां जुल्मात नहीं करता है।
तारे तोड़ भले ले कोई उसे मनाना मुश्किल ,
कुछ भी हो मुस्काने की शुरुआत नहीं करता है।
No comments:
Post a Comment