छोड कर सबके लिए रस्ता चले,
इसलिए ही उम्र भर तन्हा चले.
क्या करें जो तय न हो पाया सफ़र ,
पाँव से बांधे हुए रस्ता चले.
सांस भी कुछ इस तरह चलती रही,
जिस तरह मजदूर का खर्चा चले.
.
टूट कर भी बस यही कोशिश रही,
जिस तरह से हो सके रस्ता चले .
ये असर भी कम नहीं है आपका,
आप ना हों आपका चर्चा चले .
इस तारा गुजरा हूँ उसकी याद से,
भीड़ में ज्यों गुमशुदा बच्चा चले.
है इबादत इश्क़ भी लेकिन तभी,
जब बदन अहसास में ढ़लता चले.
इसलिए ही उम्र भर तन्हा चले.
क्या करें जो तय न हो पाया सफ़र ,
पाँव से बांधे हुए रस्ता चले.
सांस भी कुछ इस तरह चलती रही,
जिस तरह मजदूर का खर्चा चले.
.
टूट कर भी बस यही कोशिश रही,
जिस तरह से हो सके रस्ता चले .
ये असर भी कम नहीं है आपका,
आप ना हों आपका चर्चा चले .
इस तारा गुजरा हूँ उसकी याद से,
भीड़ में ज्यों गुमशुदा बच्चा चले.
है इबादत इश्क़ भी लेकिन तभी,
जब बदन अहसास में ढ़लता चले.
No comments:
Post a Comment