कुछ न भूलने वालों जैसी ,
अपनी ग़ज़ल सवालों जैसी.
याद किसी की चलते-चलते,
हुई पांव के छालों जैसी .
लगती हैं साँसें भी अब तो,
मंडी के हम्मालों जैसी. हम्मालों=मजदूर
रंग बदल कर हुई है क़िस्मत,
अब बुढ़िया के बालों जैसी .
तुझसे जुड़ने की उम्मीदें ,
घर के टूटे तालों जैसी.
तेरी मुहब्बत मेरे आगे,
फैंके हुए निवालों जैसी.
अन्दर मेरी कई ख़्वाहिशें,
है मकडी के जालों जैसी.
अपनी ग़ज़ल सवालों जैसी.
याद किसी की चलते-चलते,
हुई पांव के छालों जैसी .
लगती हैं साँसें भी अब तो,
मंडी के हम्मालों जैसी. हम्मालों=मजदूर
रंग बदल कर हुई है क़िस्मत,
अब बुढ़िया के बालों जैसी .
तुझसे जुड़ने की उम्मीदें ,
घर के टूटे तालों जैसी.
तेरी मुहब्बत मेरे आगे,
फैंके हुए निवालों जैसी.
अन्दर मेरी कई ख़्वाहिशें,
है मकडी के जालों जैसी.
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