ख़्वाहिशों की पतंगें बनाता है तू,
मैं भी देखूं कहाँ तक उड़ाता है तू.
पहले आती हैं घर में तेरी खुशबुएँ,
बाद में मुझसे मिलने को आता है तू.
जागते हैं उजाले दुआ के लिए,
जब अंधेरों से नज़रें मिलाता है तू.
उम्र भर मुझसे रातें रहीं पूछती,
मेरी नींदों में क्यों जाग जाता है तू.
मुझमें बारिश की मिटटी करे भी तो क्या,
कितने सुन्दर घरौंदे बनाता है तू.
सोचती हैं यही मेरी आसानियाँ,
मुश्किलों में ही क्यों आज़माता है तू.
हर घड़ी ज़िंदगी की बिता कर लगा,
साथ आता है तू साथ जाता है तू.
मैं भी देखूं कहाँ तक उड़ाता है तू.
पहले आती हैं घर में तेरी खुशबुएँ,
बाद में मुझसे मिलने को आता है तू.
जागते हैं उजाले दुआ के लिए,
जब अंधेरों से नज़रें मिलाता है तू.
उम्र भर मुझसे रातें रहीं पूछती,
मेरी नींदों में क्यों जाग जाता है तू.
मुझमें बारिश की मिटटी करे भी तो क्या,
कितने सुन्दर घरौंदे बनाता है तू.
सोचती हैं यही मेरी आसानियाँ,
मुश्किलों में ही क्यों आज़माता है तू.
हर घड़ी ज़िंदगी की बिता कर लगा,
साथ आता है तू साथ जाता है तू.
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