Monday, 14 March 2016

कुछ भी नही

सोचा नही अच्छा बुरा
देखा सुना कुछ भी नही!
मांगा खुदा से रात दिन
तेरे सिवा कुछ भी नही!
जिस पर हमारी आंख ने
मोती बिछाये रात भर!
भेजा वही कागज उसे
हमने लिखा कुछ भी नही!

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