Thursday, 17 March 2016

इक मौन हूँ....मै।

इक मौन हूँ ..मै ।
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संतो की साधना मे बसता,
अपनेअन्तर्द्वद मे उलझता।
दुनियां से रहता ...बेखबर,
कही आता नहीं ...नज़र।
इक शांत आवाज हूँ मै...
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इक मौन हूँ ...मै ।
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मुझसे कोई न होता ख़फ़ा।
रोक देता उठते ...तूफां,
इशारे से समझे सारा जहां,
मौन स्वीकृति निभाती वफ़ा।
इक अनोखा आभास हूँ मै......
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इक मौन हूँ....मै ।
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जवां पर लगाम कसता,
अनकहे भावो मे बसता।
शांति का आँचल पकड़ता,
छिंटाकसी से बच निकलता।
इक कठिन अभ्यास हूँ मै...
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इक मौन हूँ.....मै ।
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अंतर्मन का सिंहासन बनाता,
आत्मा का आसान सजाता।
बारूदों पे बैठो का झंझावत,
हृदय की भाषा का है स्पंदन।
शांत मुखरित होता अनहद नाद हूँ मै.
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इक मौन हूँ......मै।
 

  नोट.....बारूदों पर बैठो का झंझावत
मतलब:आज की दुनियां जो बारूदों के
ढेर पर बैठी है ..उनको अंदर से हिला देने वाला।

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