Thursday, 17 March 2016

आज गर्भ में मार दिया


फिर बच्ची को हमने आज गर्भ में मार दिया,
कुदरत की सीमाओं को फिर खूटी पर टांग दिया ।।
लड़की है लक्ष्मी रुप हम ये कैसे भूल गए
मीठी कोयल सी किलकारी बोलो कैसे भूल गए
लड़की ही है माँ हमारी हम ये कैसे भूल गए
क्यों मानवता का हमनें आज फिर संहार किया
फिर एक बच्ची को हमनें आज …………….. ।।
बोलो तुम, लड़की क्या नहीं कर सकती थी
मदर टेरेसा, आशा या लता भी हो सकती थी
इंदिरा की तरह वह चला देश भी सकती थी
लाल जोड़े की जगह कफन का कपड़ा डाल दिया
फिर एक बच्ची को हमनें आज …………….. ।।
विज्ञान ने भी देखो कैसा खेल दिखाया है
लड़का होगा या लड़की पहले ही बतलाया है
रब की सीमाओं को उसने ही झुठलाया है
लिंग अनुपात बदलकर हमने चमत्कार किया
फिर एक बच्ची को हमने आज ………….. ।।
माँ भी अपनी ममता बेटी पर लुटाना भूल गई
बेटे की खातिर वो भी बेटी के लिए बन शूल गई
पहननी थी जिनको चूड़ी वो कलाइयाँ ही मूल गई
क्यों माँ ने आज ममता को सरे आम शर्मसार किया
फिर एक बच्ची को हमने आज ……………….।।
इस भीड़ में जाने कितने लोग हत्यारे हैं
बाहर से गोरे चिट्टे मन के भीतर कारे है
हमारी नज़र में सबसे बड़े अभागे हैं
बेटे की चाहत में देखो कैसा ये अपराध किया
फिर एक बच्ची को हमने आज …………… ।।

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