लेती है जन्म डरकर बेटी जहान में;
बड़ी मुश्किलें खड़ी हैं इम्तिहान में।
लेती है जन्म——–
आते ही गर्भ मां के बेटी थी डर गई;
पैदा हुई जहां में पहले ही मर गई।
जिसकी कोख में पले बेटी वो भी थी;
आज की जो मां है छोटी वो भी थी।
लेती है जन्म——
बेटी नहीं तो हम नही, जननी कौन होगी;
कैसे चलेगी सृष्टि भगिनी कौन होगी।
बेटी को जो गर्भ में मार देते हैं ;
अपनी खुशी के लिये उसको वार देते हैं।
लेती है जन्म—–
बेटा बेटी एक समान मानना पड़ेगा;
बेटियों का मूल्य हमें जानना पड़ेगा।
बेटी नहीं तो कल नहीं मानो भाइयो;
बेटी को कोख में न मरवाओ भाइयो।
लेती है जन्म———
सहमी हुई डरी हुई रहती है बेटियां;
पैरों में उनके डालते हो क्यूं बेड़ियां।
मंजिल अपनी खुद तय करें अधिकार दो ;
बेटों की तरह थोड़ा उनको भी प्यार दो।
लेती हैं जन्म——–
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